सूरह 70 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-मआरिज (चढ़ाई के रास्ते)

سُورَةُ المَعَارِجِ
44 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
سَأَلَ سَآئِلٌۢ بِعَذَابٍۢ وَاقِعٍۢ
एक माँगने वाले[1] ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।
फ़ुटनोट[1] कहा जाता है नज़्र पुत्र ह़ारिस अथवा अबू जह्ल ने यह माँग की थी कि "ऐ अल्लाह! यदि यह सत्य है तेरी ओर से तो तू हमपर आकाश से पत्थर बरसा दे।" (देखिए : सूरतुल-अन्फाल, आयतः 32)
लिंक 70:1
2
لِّلْكَـٰفِرِينَ لَيْسَ لَهُۥ دَافِعٌۭ
काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।
लिंक 70:2
3
مِّنَ ٱللَّهِ ذِى ٱلْمَعَارِجِ
ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।
लिंक 70:3
4
تَعْرُجُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ إِلَيْهِ فِى يَوْمٍۢ كَانَ مِقْدَارُهُۥ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍۢ
फ़रिश्ते और रूह[2] उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।
फ़ुटनोट[2] रूह़ से अभिप्राय फ़रिश्ता जिबरील (अलैहिस्सलाम) हैं।
लिंक 70:4
5
فَٱصْبِرْ صَبْرًۭا جَمِيلًا
अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।
लिंक 70:5
6
إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُۥ بَعِيدًۭا
निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।
लिंक 70:6
7
وَنَرَىٰهُ قَرِيبًۭا
और हम उसे निकट देख रहे हैं।
लिंक 70:7
8
يَوْمَ تَكُونُ ٱلسَّمَآءُ كَٱلْمُهْلِ
जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।
लिंक 70:8
9
وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ
और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।[3]
फ़ुटनोट[3] देखिए : सूरतुल-क़ारिआ।
लिंक 70:9
10
وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًۭا
और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।
लिंक 70:10
11
يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ ٱلْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِى مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍۭ بِبَنِيهِ
हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।
लिंक 70:11
12
وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِ
तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।
लिंक 70:12
13
وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُـْٔوِيهِ
तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।
लिंक 70:13
14
وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا ثُمَّ يُنجِيهِ
और उन सभी लोगों[4] को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।
फ़ुटनोट[4] ह़दीस में है कि जिस नारकी को सबसे सरल यातना दी जाएगी, उससे अल्लाह कहेगा : क्या धरती का सब कुछ तुम्हें मिल जाए तो उसे इसके दंड में दे दोगे? वह कहेगा : हाँ। अल्लाह कहेगा : तुम आदम की पीठ में थे, तो मैंने तुमसे इससे सरल की माँग की थी कि मेरा किसी को साझी न बनाना, पर तुमने इनकार किया और शिर्क किया। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6557, सह़ीह़ मुस्लिम : 2805)
लिंक 70:14
15
كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ
कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।
लिंक 70:15
16
نَزَّاعَةًۭ لِّلشَّوَىٰ
जो खाल उधेड़ देने वाली है।
लिंक 70:16
17
تَدْعُوا۟ مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ
वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी[5] और मुँह मोड़ा।
फ़ुटनोट[5] अर्थात सत्य से।
लिंक 70:17
18
وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰٓ
तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।
लिंक 70:18
19
۞ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ خُلِقَ هَلُوعًا
निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।
लिंक 70:19
20
إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعًۭا
जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।
लिंक 70:20
21
وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعًا
और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।
लिंक 70:21
22
إِلَّا ٱلْمُصَلِّينَ
सिवाय नमाज़ियों के।
लिंक 70:22
23
ٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَآئِمُونَ
जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।
लिंक 70:23
24
وَٱلَّذِينَ فِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّۭ مَّعْلُومٌۭ
और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।
लिंक 70:24
25
لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ
माँगने वाले तथा वंचित[6] के लिए।
फ़ुटनोट[6] अर्थात जो न माँगने के कारण वंचित रह जाता है।
लिंक 70:25
26
وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ
और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।
लिंक 70:26
27
وَٱلَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।
लिंक 70:27
28
إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍۢ
निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।
लिंक 70:28
29
وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।
लिंक 70:29
30
إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों[7] से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।
फ़ुटनोट[7] इस्लाम में उसी दासी से संभोग उचित है जिसे सेनापति ने ग़नीमत के दूसरे धनों के समान किसी मुजाहिद के स्वामित्व में दे दिया हो। इससे पूर्व किसी बंदी स्त्री से संभोग पाप तथा व्यभिचार है। और उससे संभोग भी उस समय वैध है जब उसे एक बार मासिक धर्म आ जाए। अथवा गर्भवती हो, तो प्रसव के पश्चात् ही संभोग किया जा सकता है। इसी प्रकार जिसके स्वामित्व में आई हो, उसके सिवा और कोई उससे संभोग नहीं कर सकता।
लिंक 70:30
31
فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ
फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
लिंक 70:31
32
وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ
और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
लिंक 70:32
33
وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَـٰدَٰتِهِمْ قَآئِمُونَ
और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।
लिंक 70:33
34
وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।
लिंक 70:34
35
أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى جَنَّـٰتٍۢ مُّكْرَمُونَ
वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।
लिंक 70:35
36
فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ
फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?
लिंक 70:36
37
عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَ
दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।[8]
फ़ुटनोट[8] अर्थात जब आप क़ुरआन सुनाते हैं, तो उसका उपहास करने के लिए समूहों में होकर आ जाते हैं। और इनका दावा यह है कि स्वर्ग में जाएँगे।
लिंक 70:37
38
أَيَطْمَعُ كُلُّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍۢ
क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?
लिंक 70:38
39
كَلَّآ ۖ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ
कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़[9] से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।
फ़ुटनोट[9] अर्थात हीन जल (वीर्य) से। फिर भी घमंड करते हैं, तथा अल्लाह और उसके रसूल को नहीं मानते।
लिंक 70:39
40
فَلَآ أُقْسِمُ بِرَبِّ ٱلْمَشَـٰرِقِ وَٱلْمَغَـٰرِبِ إِنَّا لَقَـٰدِرُونَ
तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।
लिंक 70:40
41
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًۭا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।
लिंक 70:41
42
فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا۟ وَيَلْعَبُوا۟ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ
अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।
लिंक 70:42
43
يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ سِرَاعًۭا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍۢ يُوفِضُونَ
जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर[10] दौड़े जा रहे हैं।
फ़ुटनोट[10] या उनके थानों की ओर। क्योंकि संसार में वे सूर्योदय के समय बड़ी तीव्र गति से अपनी मूर्तियों की ओर दौड़ते थे।
लिंक 70:43
44
خَـٰشِعَةً أَبْصَـٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌۭ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يُوعَدُونَ
उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया[11] जाता था।
फ़ुटनोट[11] अर्थात रसूलों की ज़बानी तथा आकाशीय पुस्तकों के माध्यम से।
लिंक 70:44

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