सूरह 69 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-हाक़्क़ा (अटल घड़ी)

سُورَةُ الحَاقَّةِ
52 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
ٱلْحَآقَّةُ
होकर रहने वाली।
लिंक 69:1
2
مَا ٱلْحَآقَّةُ
क्या है वह होकर रहने वाली?
लिंक 69:2
3
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحَآقَّةُ
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?
लिंक 69:3
4
كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌۢ بِٱلْقَارِعَةِ
समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।
लिंक 69:4
5
فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا۟ بِٱلطَّاغِيَةِ
फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।
लिंक 69:5
6
وَأَمَّا عَادٌۭ فَأُهْلِكُوا۟ بِرِيحٍۢ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍۢ
और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।
लिंक 69:6
7
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍۢ وَثَمَـٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًۭا فَتَرَى ٱلْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍۢ
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।[1]
फ़ुटनोट[1] उनके भारी और लंबे होने की उपमा खजूर के तने से दी गई है।
लिंक 69:7
8
فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍۢ
तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?
लिंक 69:8
9
وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।
लिंक 69:9
10
فَعَصَوْا۟ رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةًۭ رَّابِيَةً
उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।
लिंक 69:10
11
إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَـٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ
निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव[2] में सवार किया।
फ़ुटनोट[2] इसमें नूह़ (अलैहिस्सलाम) के तूफ़ान की ओर संकेत है। और सभी मनुष्य उनकी संतान हैं, इस लिए यह दया सब पर हुई है।
लिंक 69:11
12
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةًۭ وَتَعِيَهَآ أُذُنٌۭ وَٰعِيَةٌۭ
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।
लिंक 69:12
13
فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ
फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।
लिंक 69:13
14
وَحُمِلَتِ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ
और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।[3]
फ़ुटनोट[3] दोखिए : सूरत ताहा, आयत : 20, आयत : 103, 108.
लिंक 69:14
15
فَيَوْمَئِذٍۢ وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
लिंक 69:15
16
وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِىَ يَوْمَئِذٍۢ وَاهِيَةٌۭ
तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।
लिंक 69:16
17
وَٱلْمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرْجَآئِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍۢ ثَمَـٰنِيَةٌۭ
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।
लिंक 69:17
18
يَوْمَئِذٍۢ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌۭ
उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।
लिंक 69:18
19
فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَـٰبِيَهْ
फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।
लिंक 69:19
20
إِنِّى ظَنَنتُ أَنِّى مُلَـٰقٍ حِسَابِيَهْ
मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।
लिंक 69:20
21
فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ
चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।
लिंक 69:21
22
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ
एक ऊँची जन्नत में।
लिंक 69:22
23
قُطُوفُهَا دَانِيَةٌۭ
जिसके फल निकट होंगे।
लिंक 69:23
24
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَآ أَسْلَفْتُمْ فِى ٱلْأَيَّامِ ٱلْخَالِيَةِ
(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।
लिंक 69:24
25
وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَـٰبِيَهْ
और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।
लिंक 69:25
26
وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
लिंक 69:26
27
يَـٰلَيْتَهَا كَانَتِ ٱلْقَاضِيَةَ
ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली[4] होती।
फ़ुटनोट[4] अर्थात उसके पश्चात् मैं फिर जीवित न किया जाता।
लिंक 69:27
28
مَآ أَغْنَىٰ عَنِّى مَالِيَهْ ۜ
मेरा धन मेरे किसी काम न आया।
लिंक 69:28
29
هَلَكَ عَنِّى سُلْطَـٰنِيَهْ
मेरी सत्ता[5] मुझसे जाती रही।
फ़ुटनोट[5] इसका दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि परलोक के इनकार पर जितने तर्क दिया करता था आज सब निष्फल हो गए।
लिंक 69:29
30
خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
लिंक 69:30
31
ثُمَّ ٱلْجَحِيمَ صَلُّوهُ
फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
लिंक 69:31
32
ثُمَّ فِى سِلْسِلَةٍۢ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًۭا فَٱسْلُكُوهُ
फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।
लिंक 69:32
33
إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ
निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
लिंक 69:33
34
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
लिंक 69:34
35
فَلَيْسَ لَهُ ٱلْيَوْمَ هَـٰهُنَا حَمِيمٌۭ
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
लिंक 69:35
36
وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍۢ
और न पीप के सिवा कोई भोजन है।
लिंक 69:36
37
لَّا يَأْكُلُهُۥٓ إِلَّا ٱلْخَـٰطِـُٔونَ
जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।
लिंक 69:37
38
فَلَآ أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।
लिंक 69:38
39
وَمَا لَا تُبْصِرُونَ
तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
लिंक 69:39
40
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ
निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल[6] का कथन है।
फ़ुटनोट[6] यहाँ सम्मानित रसूल से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा सूरत अत्-तक्वीर आयत : 19 में फ़रिश्ते जिबरील (अलैहिस्सलाम) जो वह़्यी लाते थे वह अभिप्राय हैं। यहाँ क़ुरआन को आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन इस अर्थ में कहा गया है कि लोग उसे आपसे सुन रहे थे। और इसी प्रकार आप जिबरील (अलैहिस्सलाम) से सुन रहे थे। अन्यथा, वास्तव में, क़ुरआन अल्लाह का कथन है, जैसा कि आगामी आयत : 43 में आ रहा है।
लिंक 69:40
41
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تُؤْمِنُونَ
और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
लिंक 69:41
42
وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تَذَكَّرُونَ
और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
लिंक 69:42
43
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
लिंक 69:43
44
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ ٱلْأَقَاوِيلِ
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर[7] लगाता।
फ़ुटनोट[7] इस आयत का भावार्थ यह कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपनी ओर से वह़्य (प्रकाशना) में कुछ अधिक या कम करने का अधिकार नहीं है। यदि वह ऐसा करेंगे, तो उन्हें कड़ी यातना दी जाएगी।
लिंक 69:44
45
لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِٱلْيَمِينِ
तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
लिंक 69:45
46
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ ٱلْوَتِينَ
फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
लिंक 69:46
47
فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَـٰجِزِينَ
फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।
लिंक 69:47
48
وَإِنَّهُۥ لَتَذْكِرَةٌۭ لِّلْمُتَّقِينَ
निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।
लिंक 69:48
49
وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।
लिंक 69:49
50
وَإِنَّهُۥ لَحَسْرَةٌ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ
और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों[8] के लिए पछतावे का कारण है।
फ़ुटनोट[8] अर्थात जो क़ुरआन को नहीं मानते, वे अंततः पछताएँगे।
लिंक 69:50
51
وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلْيَقِينِ
और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।
लिंक 69:51
52
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।
लिंक 69:52

Niyat ऐप में रोज़ पढ़ें और सुनें, नमाज़ के समय, क़िबला और आपकी पढ़ाई की जगह सेव रहती है।

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