सूरह 89 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-फ़ज्र (भोर)

سُورَةُ الفَجۡرِ
30 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
وَٱلْفَجْرِ
क़सम है फ़ज्र (उषाकाल) की!
लिंक 89:1
2
وَلَيَالٍ عَشْرٍۢ
तथा दस रातों की!
लिंक 89:2
3
وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ
और सम (जोड़े) और विषम (अकेले) की!
लिंक 89:3
4
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
और रात की, जब वह चलती है!
लिंक 89:4
5
هَلْ فِى ذَٰلِكَ قَسَمٌۭ لِّذِى حِجْرٍ
निश्चय इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी क़सम है?[1]
फ़ुटनोट[1] (1-5) इन आयतों में सबसे पहले चार चीजों की क़सम खाई गई है, जिन्हें परलोक में कर्मों के फल के सबूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिस का अर्थ यह है कि कर्मों का फल सत्य है। जिस व्यवस्था से यह दिन-रात चल रहा है उससे सिद्ध होता है कि अल्लाह ही इसे चला रहा है। "दस रात्रियों" से अभिप्राय "ज़ुल ह़िज्जा" मास की प्रारंभिक दस रातें हैं। सह़ीह़ ह़दीसों में इनकी बड़ी प्रधानता बताई गई है।
लिंक 89:5
6
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने "आद" के साथ किस तरह किया?
लिंक 89:6
7
إِرَمَ ذَاتِ ٱلْعِمَادِ
(वे आद) जो स्तंभों वाले 'इरम' (गोत्र के लोग) थे।
लिंक 89:7
8
ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَـٰدِ
जिनके समान (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा नहीं किया गया।
लिंक 89:8
9
وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا۟ ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ
तथा 'समूद' के साथ (किस तरह किया) जिन्होंने वादी में चट्टानों को तराशा।
लिंक 89:9
10
وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ
और मेखों वाले फ़िरऔन के साथ (किस तरह किया)।
लिंक 89:10
11
ٱلَّذِينَ طَغَوْا۟ فِى ٱلْبِلَـٰدِ
वे लोग, जो नगरों में हद से बढ़ गए।
लिंक 89:11
12
فَأَكْثَرُوا۟ فِيهَا ٱلْفَسَادَ
और उनमें बहुत अधिक उपद्रव फैलाया।
लिंक 89:12
13
فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ
तो तेरे पालनहार ने उनपर यातना का कोड़ा बरसाया।
लिंक 89:13
14
إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ
निःसंदेह तेरा पालनहार निश्चय घात में है।[2]
फ़ुटनोट[2] (6-14) इन आयतों में उन जातियों की चर्चा की गई है, जिन्होंने माया मोह में पड़कर परलोक और प्रतिफल का इनकार किया, और अपने नैतिक पतन के कारण धरती में उग्रवाद किया। "आद, इरम" से अभिप्रेत वह पुरानी जाति है जिसे क़ुरआन तथा अरब में "आदे ऊला" (प्रथम आद) कहा गया है। यह वह प्राचीन जाति है जिसके पास हूद (अलैहिस्सलाम) को भेजा गया। और इनको "आदे इरम" इस लिए कहा गया है कि यह शामी वंशक्रम की उस शाखा से संबंधित थे जो इरम बिन शाम बिन नूह़ से चली आती थी। आयत संख्या 11 में इसका संकेत है कि उग्रवाद का उद्गम भौतिकवाद एवं सत्य विश्वास का इनकार है, जिसे वर्तमान युग में भी प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता है।
लिंक 89:14
15
فَأَمَّا ٱلْإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ
लेकिन मनुष्य (का हाल यह है कि) जब उसका पालनहार उसका परीक्षण करे, फिर उसे सम्मानित करे और नेमत प्रदान करे, तो कहता है कि मेरे पालनहार ने मुझे सम्मानित किया।
लिंक 89:15
16
وَأَمَّآ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَهَـٰنَنِ
लेकिन जब वह उसका परीक्षण करे, फिर उसपर उसकी रोज़ी तंग कर दे, तो कहता कि मेरे पालनहार ने मुझे अपमानित किया।
लिंक 89:16
17
كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ
हरगिज़ ऐसा नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते।
लिंक 89:17
18
وَلَا تَحَـٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
तथा तुम एक-दूसरे को ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हो।
लिंक 89:18
19
وَتَأْكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكْلًۭا لَّمًّۭا
और तुम मीरास का सारा धन समेटकर खा जाते हो।
लिंक 89:19
20
وَتُحِبُّونَ ٱلْمَالَ حُبًّۭا جَمًّۭا
और तुम धन से बहुत अधिक प्रेम करते हो।[3]
फ़ुटनोट[3] (15-20) इन आयतों में समाज की साधारण नैतिक स्थिति का सर्वेक्षण किया गया है, और भौतिकवादी विचार की आलोचना की गई है, जो मात्र सांसारिक धन और मान मर्यादा को सम्मान तथा अपमान का पैमाना समझता है और यह भूल गया है कि न धनी होना कोई पुरस्कार है और न निर्धन होना कोई दंड है। अल्लाह दोनों स्थितियों में मानवजाति की परीक्षा ले रहा है। फिर यह बात किसी के बस में हो तो दूसरे का धन भी हड़प कर जाए, क्या ऐसा करना कुकर्म नहीं जिसका ह़िसाब लिया जाना चाहिए?
लिंक 89:20
21
كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّۭا دَكًّۭا
हरगिज़ नहीं! जब धरती कूट-कूटकर चूर्ण-विचूर्ण कर दी जाएगी।
लिंक 89:21
22
وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّۭا صَفًّۭا
और तेरा पालनहार आएगा और फ़रिश्ते जो पंक्तियों में होंगे।
लिंक 89:22
23
وَجِا۟ىٓءَ يَوْمَئِذٍۭ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍۢ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكْرَىٰ
और उस दिन नरक लाई जाएगी। उस दिन इनसान याद करेगा। लेकिन उस दिन याद करना उसे कहाँ से लाभ देगा।
लिंक 89:23
24
يَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى
वह कहेगा : ऐ काश! मैंने अपने (इस) जीवन के लिए कुछ आगे भेजा होता।
लिंक 89:24
25
فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌۭ
चुनाँचे उस दिन उस (अल्लाह) के दंड जैसा दंड कोई नहीं देगा।
लिंक 89:25
26
وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥٓ أَحَدٌۭ
और न उसके बाँधने जैसा कोई बाँधेगा।[4]
फ़ुटनोट[4] (21-26) इन आयतों मे बताया गया है कि धन पूजने और उससे परलोक न बनाने का दुष्परिणाम नरक की घोर यातना के रूप में सामने आएगा, तब भौतिकवादी कुकर्मियों की समझ में आएगा कि क़ुरआन को न मानकर बड़ी भूल हुई और हाथ मलेंगे।
लिंक 89:26
27
يَـٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ
ऐ संतुष्ट आत्मा!
लिंक 89:27
28
ٱرْجِعِىٓ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةًۭ مَّرْضِيَّةًۭ
अपने पालनहार की ओर लौट चल, इस हाल में कि तू उससे प्रसन्न है, उसके निकट पसंदीदा है।
लिंक 89:28
29
فَٱدْخُلِى فِى عِبَـٰدِى
अतः तू मेरे बंदों में प्रवेश कर जा।
लिंक 89:29
30
وَٱدْخُلِى جَنَّتِى
और मेरी जन्नत में प्रवेश कर जा।[5]
फ़ुटनोट[5] (27-30) इन आयतों में उनके सुख और सफलता का वर्णन किया गया है, जो क़ुरआन की शिक्षा का अनुपालन करते हुए आत्मा की शांति के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
लिंक 89:30

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