सूरह 79 (कुल 114) · मक्की

सूरह अन-नाज़िआत (खींचने वाले)

سُورَةُ النَّازِعَاتِ
46 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًۭا
क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!
लिंक 79:1
2
وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًۭا
और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!
लिंक 79:2
3
وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًۭا
और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!
लिंक 79:3
4
فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًۭا
फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!
लिंक 79:4
5
فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًۭا
फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं![1]
फ़ुटनोट[1] (1-5) यहाँ से बताया गया है कि प्रलय का आरंभ भारी भूकंप से होगा और दूसरे ही क्षण सब जीवित होकर धरती के ऊपर होंगे।
लिंक 79:5
6
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ
जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।
लिंक 79:6
7
تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ
उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।
लिंक 79:7
8
قُلُوبٌۭ يَوْمَئِذٍۢ وَاجِفَةٌ
उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।
लिंक 79:8
9
أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌۭ
उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।
लिंक 79:9
10
يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ
वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?
लिंक 79:10
11
أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًۭا نَّخِرَةًۭ
क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?
लिंक 79:11
12
قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًۭا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌۭ
उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।
लिंक 79:12
13
فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ
वह तो केवल एक डाँट होगी।
लिंक 79:13
14
فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ
फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।
लिंक 79:14
15
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ
(ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?[2]
फ़ुटनोट[2] (6-15) इन आयतों में प्रलय दिवस का चित्र पेश किया गया है। और काफ़िरों की स्थिति बताई गई है कि वे उस दिन किस प्रकार अपने आपको एक खुले मैदान में पाएँगे।
लिंक 79:15
16
إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى
जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।
लिंक 79:16
17
ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ
फ़िरऔन के पास जाओ, निश्चय वह हद से बढ़ गया है।
लिंक 79:17
18
فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ
फिर उससे कहो : क्या तुझे इस बात की इच्छा है कि तू पवित्र हो जाए?
लिंक 79:18
19
وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ
और मैं तेरे पालनहार की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ, तो तू डर जाए?
लिंक 79:19
20
فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ
फिर उसे सबसे बड़ी निशानी (चमत्कार) दिखाई।
लिंक 79:20
21
فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ
तो उसने झुठला दिया और अवज्ञा की।
लिंक 79:21
22
ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ
फिर वह पलटा (मूसा अलैहिस्सलाम के विरोध का) प्रयास करते हुए।
लिंक 79:22
23
فَحَشَرَ فَنَادَىٰ
फिर उसने (लोगों को) एकत्रित किया। फिर पुकारा।
लिंक 79:23
24
فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ
तो उसने कहा : मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ।
लिंक 79:24
25
فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ
तो अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की यातना में पकड़ लिया।
लिंक 79:25
26
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّمَن يَخْشَىٰٓ
निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा है, जो डरता है।
लिंक 79:26
27
ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا
क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आकाश को, जिसे उसने बनाया।[3]
फ़ुटनोट[3] (16-27) यहाँ से प्रलय के होने और पुनः जीवित करने के तर्क आकाश तथा धरती की रचना से दिए जा रहे हैं कि जिस शक्ति ने यह सब बनाया और तुम्हारे जीवन रक्षा की व्यवस्था की है, प्रलय करना और फिर सब को जीवित करना उसके लिए असंभव कैसे हो सकता है? तुम स्वयं विचार करके निर्णय करो।
लिंक 79:27
28
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا
उसकी छत को ऊँचा किया, फिर उसे बराबर किया।
लिंक 79:28
29
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا
और उसकी रात को अंधेरा कर दिया तथा उसके दिन के प्रकाश को प्रकट कर दिया।
लिंक 79:29
30
وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ
और उसके बाद धरती को बिछाया।
लिंक 79:30
31
أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا
उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।
लिंक 79:31
32
وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا
और पर्वतों को गाड़ दिया।
लिंक 79:32
33
مَتَـٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ
तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।
लिंक 79:33
34
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ
फिर जब बड़ी आपदा (क़ियामत) आ जाएगी।[4]
फ़ुटनोट[4] (28-34) 'बड़ी आपदा' प्रलय को कहा गया है जो उसकी घोर स्थिति का चित्रण है।
लिंक 79:34
35
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ
जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा।[5]
फ़ुटनोट[5] (35) यह प्रलय का तीसरा चरण होगा जबकि वह सामने होगी। उस दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने सांसारिक कर्म याद आएँगे और कर्मानुसार जिसने सत्य धर्म की शिक्षा का पालन किया होगा उसे स्वर्ग का सुख मिलेगा और जिसने सत्य धर्म और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नकारा और मनमानी धर्म और कर्म किया होगा वह नरक का स्थायी दुःख भोगेगा।
लिंक 79:35
36
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
और देखने वाले के लिए जहन्नम सामने कर दी जाएगी।
लिंक 79:36
37
فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
तो जो व्यक्ति हद से बढ़ गया।
लिंक 79:37
38
وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا
और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।
लिंक 79:38
39
فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
तो निःसंदेह जहन्नम ही उसका ठिकाना है।
लिंक 79:39
40
وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ
लेकिन जो अपने पालनहार के समक्ष खड़ा होने से डर गया तथा अपने मन को बुरी इच्छा से रोक लिया।
लिंक 79:40
41
فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ
तो निःसंदेह जन्नत ही उसका ठिकाना है।
लिंक 79:41
42
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا
वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी?[6]
फ़ुटनोट[6] (42) काफ़िरों का यह प्रश्न समय जानने के लिए नहीं, बल्कि हँसी उड़ाने के लिए था।
लिंक 79:42
43
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ
आपका उसके उल्लेख करने से क्या संबंध है?
लिंक 79:43
44
إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ
उस (के ज्ञान) की अंतिमता तुम्हारे पालनहार ही की ओर है।
लिंक 79:44
45
إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا
आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।[7]
फ़ुटनोट[7] (45) इस आयत में कहा गया है कि (ऐ नबी!) सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आप का दायित्व मात्र उस दिन से सावधान करना है। धर्म बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं। जो नहीं मानेगा, उसे स्वयं उस दिन समझ में आ जाएगा कि उसने क्षण भर के सांसारिक जीवन के स्वार्थ के लिए अपना स्थायी सुख खो दिया। और उस समय पछतावे का कुछ लाभ नहीं होगा।
लिंक 79:45
46
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا
जिस दिन वे उसे देखेंगे, तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) केवल एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे हैं।
लिंक 79:46

Niyat ऐप में रोज़ पढ़ें और सुनें, नमाज़ के समय, क़िबला और आपकी पढ़ाई की जगह सेव रहती है।

Niyat मुफ़्त पाएँ