सूरह 75 (कुल 114) · मक्की
सूरह अल-क़ियामह (क़यामत)
سُورَةُ القِيَامَةِ
अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
لَآ أُقْسِمُ بِيَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ
मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन[1] की।
फ़ुटनोट
[1] किसी चीज़ की क़सम खाने का अर्थ होता है, उसका निश्चित् होना। अर्थात प्रलय का होना निश्चित् है।
लिंक
75:1
2
وَلَآ أُقْسِمُ بِٱلنَّفْسِ ٱللَّوَّامَةِ
तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा[2] करने वाली अंतरात्मा की।
फ़ुटनोट
[2] मनुष्य की अंतरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उसकी निंदा करती है।
लिंक
75:2
3
أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُۥ
क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
लिंक
75:3
4
بَلَىٰ قَـٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّىَ بَنَانَهُۥ
क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
लिंक
75:4
5
بَلْ يُرِيدُ ٱلْإِنسَـٰنُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُۥ
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी[3] गुनाह करता रहे।
फ़ुटनोट
[3] अर्थात वह प्रलय तथा ह़िसाब का इनकार इसलिए करता है ताकि वह पूरी आयु कुकर्म करता रहे।
लिंक
75:5
6
7
8
9
وَجُمِعَ ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ
और सूर्य और चाँद एकत्र[4] कर दिए जाएँगे।
फ़ुटनोट
[4] अर्थात दोनों पश्चिम से अँधेरे होकर निकलेंगे।
लिंक
75:9
10
يَقُولُ ٱلْإِنسَـٰنُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ ٱلْمَفَرُّ
उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
लिंक
75:10
11
12
13
يُنَبَّؤُا۟ ٱلْإِنسَـٰنُ يَوْمَئِذٍۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ
उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।[5]
फ़ुटनोट
[5] अर्थात संसार में जो कर्म किया और जो करना चाहिए था, फिर भी नहीं किया।
लिंक
75:13
14
بَلِ ٱلْإِنسَـٰنُ عَلَىٰ نَفْسِهِۦ بَصِيرَةٌۭ
बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह[6] है।
फ़ुटनोट
[6] अर्थात वह अपने अपराधों को स्वयं भी जानता है क्योंकि पापी का मन स्वयं अपने पाप की गवाही देता है।
लिंक
75:14
15
16
لَا تُحَرِّكْ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِۦٓ
(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ[7], ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
फ़ुटनोट
[7] ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़रिश्ते जिब्रील से वह़्य पूरी होने से पहले इस भय से उसे दुहराने लगते कि कुछ भूल न जाएँ। उसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4928, 4929) इसी विषय को सूरत ताहा तथा सूरतुल-आला में भी दुहराया गया है।
लिंक
75:16
17
إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُۥ وَقُرْءَانَهُۥ
निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
लिंक
75:17
18
فَإِذَا قَرَأْنَـٰهُ فَٱتَّبِعْ قُرْءَانَهُۥ
अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
लिंक
75:18
19
20
كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ
कदापि नहीं[8], बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।
फ़ुटनोट
[8] यहाँ से बात फिर काफ़िरों की ओर फिर रही है।
लिंक
75:20
21
22
23
24
25
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌۭ
उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।
लिंक
75:25
26
كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ
कदापि नहीं[9], जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।
फ़ुटनोट
[9] अर्थात यह विचार सह़ीह़ नहीं कि मौत के पश्चात् सड़-गल जाएँगे और दोबारा जीवित नहीं किए जाएँगे। क्योंकि आत्मा रह जाती है, जो मौत के साथ ही अपने पालनहार की ओर चली जाती है।
लिंक
75:26
27
28
29
وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ
और पिंडली, पिंडली[10] के साथ लिपट जाएगी।
फ़ुटनोट
[10] अर्थात मौत का समय आ जाएगा जो निरंतर दुःख का समय होगा। (इब्ने कसीर)
लिंक
75:29
30
31
32
33
34
35
36
أَيَحْسَبُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَن يُتْرَكَ سُدًى
क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?[11]
फ़ुटनोट
[11] अर्थात न उसे किसी बात का आदेश दिया जाएगा और न रोका जाएगा और न उससे कर्मों का ह़िसाब लिया जाएगा।
लिंक
75:36
37
أَلَمْ يَكُ نُطْفَةًۭ مِّن مَّنِىٍّۢ يُمْنَىٰ
क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?
लिंक
75:37
38
ثُمَّ كَانَ عَلَقَةًۭ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ
फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।
लिंक
75:38
39
فَجَعَلَ مِنْهُ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ
फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।
लिंक
75:39
40
أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَـٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحْـِۧىَ ٱلْمَوْتَىٰ
क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?
लिंक
75:40