सूरह 56 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-वाक़िआ (होने वाली घटना)

سُورَةُ الوَاقِعَةِ
96 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
लिंक 56:1
2
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ
उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।
लिंक 56:2
3
خَافِضَةٌۭ رَّافِعَةٌ
नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।[1]
फ़ुटनोट[1] इससे अभिप्राय प्रलय है। जो सत्य के विरोधियों को नीचा करके नरक तक पहुँचाएगी। तथा आज्ञाकारियों को स्वर्ग के ऊँचे स्थान तक पहुँचाएगी। आरंभिक आयतों में प्रलय के होने की चर्चा, फिर उस दिन लोगों के तीन भागों में विभाजित होने का वर्णन किया गया है।
लिंक 56:3
4
إِذَا رُجَّتِ ٱلْأَرْضُ رَجًّۭا
जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।
लिंक 56:4
5
وَبُسَّتِ ٱلْجِبَالُ بَسًّۭا
और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।
लिंक 56:5
6
فَكَانَتْ هَبَآءًۭ مُّنۢبَثًّۭا
तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।
लिंक 56:6
7
وَكُنتُمْ أَزْوَٰجًۭا ثَلَـٰثَةًۭ
और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
लिंक 56:7
8
فَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले![2]
फ़ुटनोट[2] दाहिने हाथ वाले से अभिप्राय वे लोग हैं जिनका कर्मपत्र दाहिने हाथ में दिया जाएगा। तथा बाएँ हाथ वाले वे दुराचारी होंगे जिनका कर्मपत्र बाएँ हाथ में दिया जाएगा।
लिंक 56:8
9
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
लिंक 56:9
10
وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلسَّـٰبِقُونَ
और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।
लिंक 56:10
11
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْمُقَرَّبُونَ
यही लोग निकट किए हुए हैं।[3]
फ़ुटनोट[3] अर्थात अल्लाह के प्रियवर और उसके समीप होंगे।
लिंक 56:11
12
فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ
नेमत के बाग़ों में।
लिंक 56:12
13
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।
लिंक 56:13
14
وَقَلِيلٌۭ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ
तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।
लिंक 56:14
15
عَلَىٰ سُرُرٍۢ مَّوْضُونَةٍۢ
सोने के तारों से बुने हुए तख़्तों पर।
लिंक 56:15
16
مُّتَّكِـِٔينَ عَلَيْهَا مُتَقَـٰبِلِينَ
उनपर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे।
लिंक 56:16
17
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌۭ مُّخَلَّدُونَ
उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।
लिंक 56:17
18
بِأَكْوَابٍۢ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۢ
ऐसे प्याले َऔर सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।
लिंक 56:18
19
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ
वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।
लिंक 56:19
20
وَفَـٰكِهَةٍۢ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ
तथा ऐसे फल लेकर जिन्हें वे पसंद करते हैं।
लिंक 56:20
21
وَلَحْمِ طَيْرٍۢ مِّمَّا يَشْتَهُونَ
तथा पक्षियों का मांस लेकर जिसकी वे इच्छा रखते हैं।
लिंक 56:21
22
وَحُورٌ عِينٌۭ
और बड़ी-बड़ी नैनों वाली गोरियाँ होंगी।
लिंक 56:22
23
كَأَمْثَـٰلِ ٱللُّؤْلُؤِ ٱلْمَكْنُونِ
छिपाकर रखे हुए मोतियों के समान।
लिंक 56:23
24
جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
उसके बदले में जो वे (संसार में) किया करते थे।
लिंक 56:24
25
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا تَأْثِيمًا
वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।
लिंक 56:25
26
إِلَّا قِيلًۭا سَلَـٰمًۭا سَلَـٰمًۭا
केवल सलाम ही सलाम की आवाज़ होगी।
लिंक 56:26
27
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
लिंक 56:27
28
فِى سِدْرٍۢ مَّخْضُودٍۢ
वे बिना कँटीले बेरियों में होंगे।
लिंक 56:28
29
وَطَلْحٍۢ مَّنضُودٍۢ
तथा परत-दर-परत लगे हुए केलों में।
लिंक 56:29
30
وَظِلٍّۢ مَّمْدُودٍۢ
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।[4]
फ़ुटनोट[4] ह़दीस में है कि स्वर्ग में एक वृक्ष है जिसकी छाया में सवार सौ वर्ष चलेगा फिर भी वह समाप्त नहीं होगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4881)
लिंक 56:30
31
وَمَآءٍۢ مَّسْكُوبٍۢ
और प्रवाहित जल में।
लिंक 56:31
32
وَفَـٰكِهَةٍۢ كَثِيرَةٍۢ
तथा बहुत अधिक फलों में।
लिंक 56:32
33
لَّا مَقْطُوعَةٍۢ وَلَا مَمْنُوعَةٍۢ
जो न कभी समाप्त होंगे और न उनसे कोई रोक-टोक होगी।
लिंक 56:33
34
وَفُرُشٍۢ مَّرْفُوعَةٍ
और ऊँचे बिस्तरों पर होंगे।
लिंक 56:34
35
إِنَّآ أَنشَأْنَـٰهُنَّ إِنشَآءًۭ
निःसंदेह हमने उनको एक विशेष रूप से पैदा किया है।
लिंक 56:35
36
فَجَعَلْنَـٰهُنَّ أَبْكَارًا
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया है।
लिंक 56:36
37
عُرُبًا أَتْرَابًۭا
जो पतियों को प्रिय और समान आयु वाली हैं।
लिंक 56:37
38
لِّأَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
दाहिने हाथ वालों के लिए।
लिंक 56:38
39
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
एक बड़ा समूह पहले लोगों में से हैं।
लिंक 56:39
40
وَثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ
तथा एक बड़ा समूह पिछले लोगों में से हैं।
लिंक 56:40
41
وَأَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ
और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
लिंक 56:41
42
فِى سَمُومٍۢ وَحَمِيمٍۢ
(वे) गर्म हवा तथा खौलते जल में होंगे।
लिंक 56:42
43
وَظِلٍّۢ مِّن يَحْمُومٍۢ
और काले धुएँ के साये में होंगे।
लिंक 56:43
44
لَّا بَارِدٍۢ وَلَا كَرِيمٍ
जो न शीतल होगा और न देखने में अच्छी ही लगेगा।
लिंक 56:44
45
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ
निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।
लिंक 56:45
46
وَكَانُوا۟ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ
तथा वे बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे।
लिंक 56:46
47
وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
लिंक 56:47
48
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी?
लिंक 56:48
49
قُلْ إِنَّ ٱلْأَوَّلِينَ وَٱلْـَٔاخِرِينَ
आप कह दें : निःसंदेह अगले तथा पिछले (सभी) लोग।
लिंक 56:49
50
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَـٰتِ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ
एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।
लिंक 56:50
51
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلْمُكَذِّبُونَ
फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!
लिंक 56:51
52
لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرٍۢ مِّن زَقُّومٍۢ
निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।[5]
फ़ुटनोट[5] (देखिए : सूरह साफ़्फ़ात, आयत : 62)
लिंक 56:52
53
فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ
फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।
लिंक 56:53
54
فَشَـٰرِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْحَمِيمِ
फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।
लिंक 56:54
55
فَشَـٰرِبُونَ شُرْبَ ٱلْهِيمِ
फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट[6] के समान।
फ़ुटनोट[6] यह ऊँट में एक विशेष रोग होता है जिससे उसकी प्यास नहीं जाती।
लिंक 56:55
56
هَـٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ ٱلدِّينِ
यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।
लिंक 56:56
57
نَحْنُ خَلَقْنَـٰكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ
हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?
लिंक 56:57
58
أَفَرَءَيْتُم مَّا تُمْنُونَ
तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?
लिंक 56:58
59
ءَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلْخَـٰلِقُونَ
क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
लिंक 56:59
60
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ ٱلْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।
लिंक 56:60
61
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ
कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
लिंक 56:61
62
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ
तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?
लिंक 56:62
63
أَفَرَءَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ
फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?
लिंक 56:63
64
ءَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلزَّٰرِعُونَ
क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?
लिंक 56:64
65
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَـٰهُ حُطَـٰمًۭا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ
यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।
लिंक 56:65
66
إِنَّا لَمُغْرَمُونَ
कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।
लिंक 56:66
67
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ
बल्कि हम वंचित हो गए हैं।
लिंक 56:67
68
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?
लिंक 56:68
69
ءَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ ٱلْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنزِلُونَ
क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?
लिंक 56:69
70
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَـٰهُ أُجَاجًۭا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ
यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?
लिंक 56:70
71
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?
लिंक 56:71
72
ءَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنشِـُٔونَ
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
लिंक 56:72
73
نَحْنُ جَعَلْنَـٰهَا تَذْكِرَةًۭ وَمَتَـٰعًۭا لِّلْمُقْوِينَ
हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।
लिंक 56:73
74
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।
लिंक 56:74
75
۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!
लिंक 56:75
76
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌۭ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ
और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।
लिंक 56:76
77
إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌۭ كَرِيمٌۭ
निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।
लिंक 56:77
78
فِى كِتَـٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ
एक छिपाकर रखी हुई[7] किताब में (अंकित) है।
फ़ुटनोट[7] इससे अभिप्राय 'लौह़े मह़फ़ूज़' है।
लिंक 56:78
79
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ
इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।[8]
फ़ुटनोट[8] इससे अभिप्राय फ़रिश्तें हैं। (देखिए : सूरत अबस, आयत : 15-16)
लिंक 56:79
80
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।
लिंक 56:80
81
أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ
फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?
लिंक 56:81
82
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?
लिंक 56:82
83
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ
फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।
लिंक 56:83
84
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍۢ تَنظُرُونَ
और तुम उस समय देख रहे होते हो।
लिंक 56:84
85
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ
तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।
लिंक 56:85
86
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
लिंक 56:86
87
تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?
लिंक 56:87
88
فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ
फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।
लिंक 56:88
89
فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ
तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।
लिंक 56:89
90
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।
लिंक 56:90
91
فَسَلَـٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।
लिंक 56:91
92
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ
और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,
लिंक 56:92
93
فَنُزُلٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ
तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।
लिंक 56:93
94
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ
तथा जहन्नम की आग में जलना है।
लिंक 56:94
95
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ
निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।
लिंक 56:95
96
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।
लिंक 56:96

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