सूरह 56 (कुल 114) · मक्की
सूरह अल-वाक़िआ (होने वाली घटना)
سُورَةُ الوَاقِعَةِ
अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
2
3
خَافِضَةٌۭ رَّافِعَةٌ
नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।[1]
फ़ुटनोट
[1] इससे अभिप्राय प्रलय है। जो सत्य के विरोधियों को नीचा करके नरक तक पहुँचाएगी। तथा आज्ञाकारियों को स्वर्ग के ऊँचे स्थान तक पहुँचाएगी। आरंभिक आयतों में प्रलय के होने की चर्चा, फिर उस दिन लोगों के तीन भागों में विभाजित होने का वर्णन किया गया है।
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56:3
4
5
6
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8
فَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ
तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले![2]
फ़ुटनोट
[2] दाहिने हाथ वाले से अभिप्राय वे लोग हैं जिनका कर्मपत्र दाहिने हाथ में दिया जाएगा। तथा बाएँ हाथ वाले वे दुराचारी होंगे जिनका कर्मपत्र बाएँ हाथ में दिया जाएगा।
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56:8
9
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ
और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
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56:9
10
11
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْمُقَرَّبُونَ
यही लोग निकट किए हुए हैं।[3]
फ़ुटनोट
[3] अर्थात अल्लाह के प्रियवर और उसके समीप होंगे।
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56:11
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15
16
17
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌۭ مُّخَلَّدُونَ
उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।
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56:17
18
بِأَكْوَابٍۢ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۢ
ऐसे प्याले َऔर सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।
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56:18
19
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ
वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।
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56:19
20
21
22
23
24
25
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا تَأْثِيمًا
वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।
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56:25
26
27
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
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56:27
28
29
30
وَظِلٍّۢ مَّمْدُودٍۢ
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।[4]
फ़ुटनोट
[4] ह़दीस में है कि स्वर्ग में एक वृक्ष है जिसकी छाया में सवार सौ वर्ष चलेगा फिर भी वह समाप्त नहीं होगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4881)
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56:30
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41
وَأَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ
और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
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56:41
42
43
44
45
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ
निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।
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56:45
46
47
وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
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56:47
48
49
50
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَـٰتِ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ
एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।
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56:50
51
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلْمُكَذِّبُونَ
फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!
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56:51
52
لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرٍۢ مِّن زَقُّومٍۢ
निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।[5]
फ़ुटनोट
[5] (देखिए : सूरह साफ़्फ़ात, आयत : 62)
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56:52
53
54
55
فَشَـٰرِبُونَ شُرْبَ ٱلْهِيمِ
फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट[6] के समान।
फ़ुटनोट
[6] यह ऊँट में एक विशेष रोग होता है जिससे उसकी प्यास नहीं जाती।
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56:55
56
57
نَحْنُ خَلَقْنَـٰكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ
हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?
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56:57
58
59
ءَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلْخَـٰلِقُونَ
क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
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56:59
60
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ ٱلْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।
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56:60
61
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ
कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
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56:61
62
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ
तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?
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56:62
63
64
ءَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلزَّٰرِعُونَ
क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?
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56:64
65
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَـٰهُ حُطَـٰمًۭا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ
यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।
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56:65
66
67
68
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?
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56:68
69
ءَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ ٱلْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنزِلُونَ
क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?
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56:69
70
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَـٰهُ أُجَاجًۭا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ
यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?
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56:70
71
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?
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56:71
72
ءَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنشِـُٔونَ
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
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56:72
73
نَحْنُ جَعَلْنَـٰهَا تَذْكِرَةًۭ وَمَتَـٰعًۭا لِّلْمُقْوِينَ
हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।
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56:73
74
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।
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56:74
75
۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!
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56:75
76
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌۭ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ
और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।
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56:76
77
78
فِى كِتَـٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ
एक छिपाकर रखी हुई[7] किताब में (अंकित) है।
फ़ुटनोट
[7] इससे अभिप्राय 'लौह़े मह़फ़ूज़' है।
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56:78
79
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ
इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।[8]
फ़ुटनोट
[8] इससे अभिप्राय फ़रिश्तें हैं। (देखिए : सूरत अबस, आयत : 15-16)
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56:79
80
81
أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ
फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?
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56:81
82
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ
तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?
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56:82
83
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ
फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।
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56:83
84
85
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ
तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।
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56:85
86
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
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56:86
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89
فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ
तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।
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56:89
90
91
فَسَلَـٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ
तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।
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56:91
92
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ
और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,
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56:92
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