सूरह 87 (कुल 114) · मक्की
सूरह अल-आला (सर्वोच्च)
سُورَةُ الأَعۡلَىٰ
अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
2
3
4
وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ
और जिसने चारा उगाया।[1]
फ़ुटनोट
[1] (1-4) इन आयतों में जिस पालनहार ने अपने नाम की पवित्रता का वर्णन करने का आदेश दिया है उसका परिचय दिया गया है कि वह पालनहार है जिसने सभी को पैदा किया, फिर उनको संतुलित किया, और उनके लिए एक विशेष प्रकार का अनुमान बनाया जिसकी सीमा से नहीं निकल सकते, और उनके लिए उस कार्य को पूरा करने की राह दिखाई जिसके लिए उन्हें पैदा किया है।
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87:4
5
فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ
फिर उसे (सुखाकर) काले रंग का कूड़ा बना दिया।[2]
फ़ुटनोट
[2] (4-5) इन आयतों में बताया गया है कि प्रत्येक कार्य अनुक्रम से धीरे-धीरे होते हैं। धरती के पौधे धीरे-धीरे गुंजान और हरे-भरे होते हैं। ऐसे ही मानवीय योग्यताएँ भी धीरे-धीरे पूरी होती हैं।
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87:5
6
7
إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ
परन्तु जो अल्लाह चाहे। निश्चय ही वह खुली बात को जानता है और उस बात को भी जो छिपी हुई है।
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87:7
8
وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ
और हम तुम्हारे लिए सरल मार्ग आसान कर देंगे।[3]
फ़ुटनोट
[3] (6-8) इनमें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह निर्देश दिया गया है कि इसकी चिंता न करें कि क़ुरआन मुझे कैसे याद होगा, इसे याद कराना हमारा काम है, और इसका सुरक्षित रहना हमारी दया से होगा। और यह उसकी दया और रक्षा है कि इस मानव संसार में किसी धार्मिक ग्रंथ के संबंध में यह दावा नहीं किया जा सकता कि वह सुरक्षित है, यह गौरव केवल क़ुरआन ही को प्राप्त है।
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87:8
9
10
11
12
13
ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।[4]
फ़ुटनोट
[4] (9-13) इनमें बताया गया है कि आपको मात्र इसका प्रचार-प्रसार करना है। और इसकी सरल राह यह है कि जो सुने और मानने के लिए तैयार हो, उसे शिक्षा दी जाए। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यकता नहीं है। जो हत्भागे हैं, वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।
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87:13
14
15
وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ
तथा अपने पालनहार के नाम को याद किया और नमाज़ पढ़ी।[5]
फ़ुटनोट
[5] (14-15) इन आयतों में कहा गया है कि सफलता मात्र उनके लिए है, जो आस्था, स्वभाव तथा कर्म की पवित्रता को अपनाएँ, और नमाज़ अदा करते रहें।
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87:15
16
17
وَٱلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌۭ وَأَبْقَىٰٓ
हालाँकि आख़िरत बहुत उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाली है।
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87:17
18
19
صُحُفِ إِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ
इबराहीम तथा मूसा के सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में।[6]
फ़ुटनोट
[6] (16-19) इन आयतों का भावार्थ यह है कि वास्तव में रोग यह है कि काफ़िरों को सांसारिक स्वार्थ के कारण नबी की बातें अच्छी नहीं लगतीं। जबकि परलोक ही स्थायी है। और यही सभी आदि ग्रंथों की शिक्षा है।
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87:19