सूरह 77 (कुल 114) · मक्की
सूरह अल-मुरसलात (भेजी जाने वाली हवाएँ)
سُورَةُ المُرۡسَلَاتِ
अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
2
3
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا
और बादलों को फैलाने वाली हवाओं[1] की क़सम!
फ़ुटनोट
[1] अर्थात जो हवाएँ अल्लाह के आदेशानुसार बादलों को फैलाती हैं।
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77:3
4
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا
फिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़[2] के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
फ़ुटनोट
[2] अर्थात सत्यासत्य तथा वैध और अवैध के बीच अंतर करने के लिए आदेश लाते हैं।
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77:4
5
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
फिर वह़्य[3] लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
फ़ुटनोट
[3] अर्थात जो वह़्य (प्रकाशना) ग्रहण करके उसे रसूलों तक पहुँचाते हैं।
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77:5
6
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
उज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने[4] के लिए।
फ़ुटनोट
[4] अर्थात ईमान लाने वालों के लिये क्षमा का वचन तथा काफ़िरों के लिये यातना की सूचना लाते हैं।
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77:6
7
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ
निःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।
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77:7
8
9
10
11
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
और जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।[5]
फ़ुटनोट
[5] उनके तथा उनके समुदायों के बीच निर्णय करने के लिए, और रसूल गवाही देंगे।
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77:11
12
13
14
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?
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77:14
15
16
17
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
फिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।[6]
फ़ुटनोट
[6] अर्थात उन्हीं के समान यातना ग्रस्त कर देंगे।
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77:17
18
19
20
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ
क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?
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77:20
21
22
23
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
फिर हमने अनुमान[8] लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।
फ़ुटनोट
[8] अर्थात मानव शरीर की संरचना और उसके अंगों का।
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77:23
24
25
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
क्या हमने धरती को समेटने[9] वाली नहीं बनाया?
फ़ुटनोट
[9] अर्थात जब तक लोग जीवित रहते हैं, तो उसके ऊपर रहते तथा बसते हैं और मरण के पश्चात उसी में चले जाते हैं।
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77:25
26
27
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا
तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।
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77:27
28
29
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।
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77:29
30
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ
एक छाया[10] की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
फ़ुटनोट
[10] छाया से अभिप्राय नरक के धुँवे की छाया है, जो तीन दिशाओं में फैली होगी।
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77:30
31
32
33
34
35
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
यह वह दिन है कि वे बोल[11] नहीं सकेंगे।
फ़ुटनोट
[11] अर्थात उनके विरुद्ध ऐसे तर्क प्रस्तुत कर दिए जाएँगे कि वे अवाक रह जाएँगे।
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77:35
36
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।
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77:36
37
38
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।
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77:38
39
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ
तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल[12] हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।
फ़ुटनोट
[12] अर्थात मेरी पकड़ से बचने की।
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77:39
40
41
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ
निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।
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77:41
42
43
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
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77:43
44
45
46
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा[13] आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।
फ़ुटनोट
[13] अर्थात सांसारिक जीवन में।
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77:46
47
48
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ
तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।
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77:48
49
50
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान[14] लाएँगे?
फ़ुटनोट
[14] अर्थात जब अल्लाह की अंतिम पुस्तक पर ईमान नहीं लाते, तो फिर कोई दूसरी पुस्तक नहीं हो सकती, जिस पर वे ईमान लाएँ। इसलिए कि अब और कोई पुस्तक आसमान से आने वाली नहीं है।
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77:50