सूरह 77 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-मुरसलात (भेजी जाने वाली हवाएँ)

سُورَةُ المُرۡسَلَاتِ
50 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا
क़सम है उन हवाओं की जो निरंतर भेजी जाती हैं!
लिंक 77:1
2
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًۭا
फिर बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम!
लिंक 77:2
3
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا
और बादलों को फैलाने वाली हवाओं[1] की क़सम!
फ़ुटनोट[1] अर्थात जो हवाएँ अल्लाह के आदेशानुसार बादलों को फैलाती हैं।
लिंक 77:3
4
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا
फिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़[2] के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
फ़ुटनोट[2] अर्थात सत्यासत्य तथा वैध और अवैध के बीच अंतर करने के लिए आदेश लाते हैं।
लिंक 77:4
5
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا
फिर वह़्य[3] लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
फ़ुटनोट[3] अर्थात जो वह़्य (प्रकाशना) ग्रहण करके उसे रसूलों तक पहुँचाते हैं।
लिंक 77:5
6
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا
उज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने[4] के लिए।
फ़ुटनोट[4] अर्थात ईमान लाने वालों के लिये क्षमा का वचन तथा काफ़िरों के लिये यातना की सूचना लाते हैं।
लिंक 77:6
7
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ
निःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।
लिंक 77:7
8
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ
फिर जब तारे मिटा दिए जाएँगे।
लिंक 77:8
9
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ
और जब आकाश फाड़ दिया जाएगा।
लिंक 77:9
10
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ
और जब पर्वत उड़ा दिए जाएँगे।
लिंक 77:10
11
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ
और जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।[5]
फ़ुटनोट[5] उनके तथा उनके समुदायों के बीच निर्णय करने के लिए, और रसूल गवाही देंगे।
लिंक 77:11
12
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ
किस दिन के लिए वे विलंबित किए गए हैं?
लिंक 77:12
13
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ
निर्णय के दिन के लिए।
लिंक 77:13
14
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?
लिंक 77:14
15
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:15
16
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ
क्या हमने पहलों को विनष्ट नहीं किया?
लिंक 77:16
17
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ
फिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।[6]
फ़ुटनोट[6] अर्थात उन्हीं के समान यातना ग्रस्त कर देंगे।
लिंक 77:17
18
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ
हम अपराधियों के साथ ऐसा ही करते हैं।
लिंक 77:18
19
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:19
20
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ
क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?
लिंक 77:20
21
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ
फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।
लिंक 77:21
22
إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ
एक ज्ञात अवधि तक।[7]
फ़ुटनोट[7] अर्थात गर्भ की अवधि तक।
लिंक 77:22
23
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ
फिर हमने अनुमान[8] लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।
फ़ुटनोट[8] अर्थात मानव शरीर की संरचना और उसके अंगों का।
लिंक 77:23
24
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:24
25
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا
क्या हमने धरती को समेटने[9] वाली नहीं बनाया?
फ़ुटनोट[9] अर्थात जब तक लोग जीवित रहते हैं, तो उसके ऊपर रहते तथा बसते हैं और मरण के पश्चात उसी में चले जाते हैं।
लिंक 77:25
26
أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا
जीवित और मृत लोगों को।
लिंक 77:26
27
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا
तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।
लिंक 77:27
28
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:28
29
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ
(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।
लिंक 77:29
30
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ
एक छाया[10] की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
फ़ुटनोट[10] छाया से अभिप्राय नरक के धुँवे की छाया है, जो तीन दिशाओं में फैली होगी।
लिंक 77:30
31
لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ
जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।
लिंक 77:31
32
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ
निःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।
लिंक 77:32
33
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ
जैसे वे पीले ऊँट हों।
लिंक 77:33
34
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:34
35
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ
यह वह दिन है कि वे बोल[11] नहीं सकेंगे।
फ़ुटनोट[11] अर्थात उनके विरुद्ध ऐसे तर्क प्रस्तुत कर दिए जाएँगे कि वे अवाक रह जाएँगे।
लिंक 77:35
36
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ
और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।
लिंक 77:36
37
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:37
38
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ
यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।
लिंक 77:38
39
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ
तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल[12] हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।
फ़ुटनोट[12] अर्थात मेरी पकड़ से बचने की।
लिंक 77:39
40
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:40
41
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ
निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।
लिंक 77:41
42
وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
तथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।
लिंक 77:42
43
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
लिंक 77:43
44
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ
हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
लिंक 77:44
45
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:45
46
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा[13] आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।
फ़ुटनोट[13] अर्थात सांसारिक जीवन में।
लिंक 77:46
47
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:47
48
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ
तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।
लिंक 77:48
49
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
लिंक 77:49
50
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ
फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान[14] लाएँगे?
फ़ुटनोट[14] अर्थात जब अल्लाह की अंतिम पुस्तक पर ईमान नहीं लाते, तो फिर कोई दूसरी पुस्तक नहीं हो सकती, जिस पर वे ईमान लाएँ। इसलिए कि अब और कोई पुस्तक आसमान से आने वाली नहीं है।
लिंक 77:50

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