सूरह 107 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-माऊन (छोटी-छोटी चीज़ें)

سُورَةُ المَاعُونِ
7 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ
(ऐ नबी!) क्या आपने उसे देखा, जो बदले के दिन को झुठलाता है?
लिंक 107:1
2
فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ
तो यही है, जो अनाथ (यतीम) को धक्के देता है।
लिंक 107:2
3
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है।[1]
फ़ुटनोट[1] (2-3) इन आयतों में उन काफ़िरों (अधर्मियों) की दशा बताई गई है जो परलोक का इनकार करते थे।
लिंक 107:3
4
فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ
तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,[2]
फ़ुटनोट[2] इन आयतों में उन मुनाफ़िक़ों की दशा का वर्णन किया गया है, जो ऊपर से मुसलमान हैं परंतु उनके दिलों में परलोक और प्रतिकार का विश्वास नहीं है। इन दोनों प्रकारों के आचरण और स्वभाव को बयान करने से अभिप्राय यह बताना है कि इनसान में सदाचार की भावना परलोक पर विश्वास के बिना उत्पन्न नहीं हो सकती। और इस्लाम परलोक का सह़ीह विश्वास देकर इनसानों में अनाथों और ग़रीबों की सहायता की भावना पैदा करता है और उसे उदार तथा परोपकारी बनाता है।
लिंक 107:4
5
ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ
जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं।
लिंक 107:5
6
ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ
वे जो दिखावा करते हैं।
लिंक 107:6
7
وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ
तथा साधारण बरतने की चीज़ भी माँगने से नहीं देते।[3]
फ़ुटनोट[3] आयत संख्या 7 में मामूली चाज़ के लिए 'माऊन' शब्द का प्रयोग हुआ है। जिसका अर्थ है साधारण माँगने के सामान जैसे पानी, आग, नमक, डोल आदि। और आयत का अभिप्राय यह है कि आख़िरत का इनकार किसी व्यक्ति को इतना तंगदिल बना देता है कि वह साधारण उपकार के लिए भी तैयार नहीं होता।
लिंक 107:7

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