सूरह 95 (कुल 114) · मक्की

सूरह अत-तीन (अंजीर)

سُورَةُ التِّينِ
8 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
लिंक 95:1
2
وَطُورِ سِينِينَ
एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
लिंक 95:2
3
وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ
और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
लिंक 95:3
4
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ
निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
लिंक 95:4
5
ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ
फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
लिंक 95:5
6
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
लिंक 95:6
7
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ
फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
लिंक 95:7
8
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
लिंक 95:8

Niyat ऐप में रोज़ पढ़ें और सुनें, नमाज़ के समय, क़िबला और आपकी पढ़ाई की जगह सेव रहती है।

Niyat मुफ़्त पाएँ