सूरह 109 (कुल 114) · मक्की

सूरह अल-काफ़िरून (काफ़िर)

سُورَةُ الكَافِرُونَ
6 आयतें

अर्थों का अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari, QuranEnc.com, संस्करण 1.1.5। अनुवाद कुरआन के अर्थ बताता है। असल कुरआन अरबी पाठ है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
1
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْكَـٰفِرُونَ
(ऐ नबी!) आप कह दीजिए : ऐ काफ़िरो!
लिंक 109:1
2
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
मैं उसकी इबादत नहीं करता, जिसकी तुम इबादत करते हो।
लिंक 109:2
3
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
लिंक 109:3
4
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ
और न मैं उसकी इबादत करने वाला हूँ, जिसकी इबादत तुमने की है।
लिंक 109:4
5
وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ
और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
लिंक 109:5
6
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ
तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म तथा मेरे लिए मेरा धर्म है।[1]
फ़ुटनोट[1] (1-6) पूरी सूरत का भावार्थ यह है कि इस्लाम में वही ईमान (विश्वास) मान्य है, जो पूर्ण तौह़ीद (एकेश्वर्वाद) के साथ हो, अर्थात अल्लाह के अस्तित्व तथा गुणों और उसके अधिकारों में किसी को साझी न बनाया जाए। क़ुरआन की शिक्षानुसार जो अल्लाह को नहीं मानता, और जो मानता है परंतु उसके साथ देवी-देवताओं को भी मानात है, तो दोनों में कोई अंतर नहीं। उसके विशेष गुणों को किसी अन्य में मानना उसको न मानने ही के बराबर है और दोनों ही काफ़िर हैं। (देखिए : उम्मुल किताब, मौलाना आज़ाद)
लिंक 109:6

Niyat ऐप में रोज़ पढ़ें और सुनें, नमाज़ के समय, क़िबला और आपकी पढ़ाई की जगह सेव रहती है।

Niyat मुफ़्त पाएँ